Forgotten "father"
गुमनाम पिता ************************************** प्रणय के अंतरंग छण मे, प्रेम के बीज तो...! पड़े ही होंगे.., तुम्हारे ह्रदय के अन्तः मे../ अब कभी अगर .., ये भावना बन के,. उमरे...!, घुमरे...! अथवाप्रिडा दे...? तो लोक-लज्जा के भय से .., इसका गला मत घोट देना....!! तुम, इसे,....शब्द देना..., यह "गुमनाम" पिता का पुत्र होगा ..!! -प्रभाकर झा "कुरमगज़"