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Showing posts from September 12, 2018
आज शरद की इस  चांदनी रात में ...! जब चाँद बिछा चूका होगा हर जंगल ..हर राह में अपनी सुनहली किरणों का सेज। तब फिर से तुझको तरसती आंखे सूनी राहों का पीछा करेंगे ..., और मेरे  मन  का बैचन  पंछी उड़ जायेंगे फिर से खोजने  तुम्हे नदी ...पहाड़ और बादलो में ..!