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Showing posts from February 11, 2025
जब से मिला हूँ, और अब  तक,  ये निश्चित  से जाना है, आपकी, नजरअंदाजगी। ...चल जायेगा ! नाराजगी ? ... मार जाता है   !

यात्री हूँ

में ठहर नहीं सकता। ...! शापित -सनातन यात्री हूँ,  चिर काल तक मुझे चलना है ! किसी राह - किसी मोड़ पर, हर बार मिलता  रहूँगा !