आज शरद की इस  चांदनी रात में ...!
जब चाँद बिछा चूका होगा
हर जंगल ..हर राह में
अपनी सुनहली किरणों का सेज।
तब फिर से तुझको तरसती आंखे
सूनी राहों का पीछा करेंगे ..., और
मेरे  मन  का बैचन  पंछी
उड़ जायेंगे फिर से
खोजने  तुम्हे
नदी ...पहाड़ और बादलो में ..!

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let me go............!!chodo mujhe jane do..